Saurabh
यह फूल मिला मुझे, पणजी में, मंडोवी के किनारे। तमाम मुश्किलों के बावजूद इसने जिंदा रहने की ज़िद की। जो मंहुसियत कभी अहमदाबाद में फैलाई गई थी, नदी के किनारे को concrete में ढलने की, वो अब गोवा में भी फैल रही है।
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