Saurabh
हाँ उम्मीद है। दिल टूट चुका है मग़र उम्मीद क़ायम है। अरविंद से नहीं तो मनीष से। कोई तो कुछ करेगा। इसीलिए बार बार गुहार लगाई जा रही है। मत खेलो साम्प्रदायिकता का खेल।