बात ऊपर से सुन कर सही लगती है इनकी। मगर गौर करने की बात यह है कि इस देश में minorities ही आगे हैं - पारसी, जैन, ब्राह्मण, अशरफ, बनिया और खत्री सिख। और majority पीछे थीं, हैं, और रहेंगी भी - बहुजन, पसमांदा, दलित, अधिवासी।
हुकूमत अशरफों ने की, पिछड़े पसमांदा रह गए। इसलिए धर्म से ना बाटें, कि मुसलमानों ने राज भी किया और अब स्पेशल स्टैटस भी चाहिए। विभाजन जाति से करें, तो देखेंगे कि अशरफों ब्राह्मणों राजपूतों ने मिल कर राज किया, और किसी ने अपने धर्म के पिछड़ों के लिए कुछ ना किया। और जिसने किया उसने सिर्फ अपने धर्म की पिछड़ों के लिए नहीं किया, ब्लकि सभी पिछड़ों के लिए किया।
हुकूमत अशरफों ने की, पिछड़े पसमांदा रह गए। इसलिए धर्म से ना बाटें, कि मुसलमानों ने राज भी किया और अब स्पेशल स्टैटस भी चाहिए। विभाजन जाति से करें, तो देखेंगे कि अशरफों ब्राह्मणों राजपूतों ने मिल कर राज किया, और किसी ने अपने धर्म के पिछड़ों के लिए कुछ ना किया। और जिसने किया उसने सिर्फ अपने धर्म की पिछड़ों के लिए नहीं किया, ब्लकि सभी पिछड़ों के लिए किया।