Saurabh
कल ईद थी। ख़बर मिली है कि काफ़ी लोगों की दुआएं आज कुबूल हुई हैं।

कल राखी का त्योहार है। आवाम को अपनी खुशी ज़ोर शोर से ज़ाहिर करने का बहाना मिल गया।

चचा हमारे आपके, इसी सन्दर्भ में कुछ कह के निकले थे:

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया, मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज तमाशा, मेरे आगे

मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे

हमपेशा-ओ-हमशरब-ओ-हमराज़ है मेरा
'ग़ालिब' को बुरा क्यों, कहो अच्छा, मेरे आगे

Edit: Looks like we need versions of this post in Kannada and Tamil also. काफ़ी जगहों से दुआएँ कुबूल होने की ख़बर आई है। Of course it could all be a तमाशा also, like I was saying.