धर्म कोई भी हो, धर्म कि सिर्फ़ दलाली बाकी है।
Building on what Kanhaiya said, तुम मे इतनी हैसियत हो गई कि भगवान का कुछ कर पाओ? जो भगवान कण कण में है, उसका घर बनाने चले हो, उसे बचाने चले हो। किसी दूसरे इंसान के लिए कुछ कर लो, वही बहुत है।
Building on what Kanhaiya said, तुम मे इतनी हैसियत हो गई कि भगवान का कुछ कर पाओ? जो भगवान कण कण में है, उसका घर बनाने चले हो, उसे बचाने चले हो। किसी दूसरे इंसान के लिए कुछ कर लो, वही बहुत है।