Saurabh
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है

सुकूत - शांती
ज़र्फ़ - क्षमता

(will find the shayar's name and update soon)