Saurabh
बड़े अच्छे लगते हैं
यह धरती, यह नदिया, यह रैना

और तुम

तुम इन सब को छोड़ के कैसे कल सुबह जाओगी?
मेरे साथ इन्हें भी तो तुम याद बहुत आओगी