Saurabh
आज एक dentist ने मेरे दो दाँत उखाड़ दिए।

दाँतों का कोई कसूर नहीं था। वह तो अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे थे। बस नीचे वाला दाँत कुछ टेढ़ा उगा था। मुझे तमीज़ से brush करना भी नहीं आता। सो उस टेढ़े दाँत के नीचे गन्दगी इक्ट्ठा होने लगी।

Dentist ने नीचे वाले दाँत को उखाड़ फेंका। अब बताइए ऊपर वाला दाँत क्यों निकाला गया? अरे वोह बेचारा तो दोस्ती में मारा गया। नीचे वाला दाँत के जाने के बाद, यह भाई साहब मसूड़े को काटने लगते। सो इन्हें भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

मेरे जबड़े ने बड़ी कस के जकड़ रखा था इन्हें। Dentist को अच्छी मेहनत करनी पड़ी। अखिरकार उसके हथियारों के सामने यह निहत्थे कुछ ना कर पाए।

अब आलम यह है कि मैं शराबियों की तरह बातें कर रहा हूँ। वोह local anesthesia जो दिया हुआ है dentist ने। आधा मुँह तो सुन्न है। बस इंतज़ार कर रहे हैं, खौफ़ भरे दिल से, कि anesthetic का असर उतरे और असहाय दर्द शुरू हो।

बारह साल से पाल के रखा था इन्हें। बारह साल पहले, मद्रास की मेरी पुरानी dentist ने बता दिया था कि बेटा यह तुम्हें बहुत दुख देंगे। अभी अभी निकले हैं, wisdom tooth हैं, निकलवा दो। उन्हें मेरी फिक़रत पता थी, कि मैं कितना डरपोक हूँ। हाथ पकड़ लिया मेरा। मैंने भी कहा, डॉक्टर साहिबा toilet तो जाने द। फिर जो करना है कर लेना। उन्होंने हाथ छोड़ा और मैं बिना fees दिए वहाँ से भाग खड़ा हुआ।